पत्रकारिता चौथा आधार स्तम्भ
आधुनिक युग में पत्रकारिता का क्षेत्र अत्यंत विस्तृत और परिष्कृत हो चुका है. न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि वैश्विक स्तर पर इसकी भूमिका काफ़ी महत्वपूर्ण हो चुकी है. अब यह मात्र सूचना के आदान प्रदान तक सीमित नहीं है. वरन इसने लोगों को उनके अधिकार के प्रति जागरूक भी किया है. भारत में विधायिका, न्यायपालिक और कार्यपालिका के बाद पत्रकारिता को चौथे आधार स्तम्भ के रूप में जाना जाता है.
जैसे देश का सर्वोच्च न्यायालय लोगों को न्याय देता है वैसे ही पत्रकारिता लोगों के न्याय के लिए संवैधानिक तरीके से उनके साथ ख़डी होती है. आज हम पत्रकारिता के विभिन्न रूप देख रहे हैं. प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया आदि सभी इसी के रूप हैं. एक ओर जहाँ इसके अच्छे काम की प्रशंसा होती है वही इसे कुछ पत्रकारों की निम्न कोटि की हरकतों और राजीनीति की देवदासी के रूप में भर्त्स्ना भी की जाती है. कोई इसे गोदी मीडिया कहता है तो कोई बिकाऊ मीडिया कहता है.
समझना कठिन है कि इसका वास्तविक स्वरुप क्या है. आज विश्व में टी वी चैनल, यू ट्यूब चैनल, फेसबुक, इंस्टाग्राम, ब्लॉगिंग जैसे सभी सामाजिक माध्यमों को इंटर नेट ने एक तेज रफ्तार दे दी है, अतः स्पष्ट रूप को समझने में संदेह और भ्रान्ति की स्थिति उत्पन्न हो गई तथा संबंधो में दूरियां है तो नजदीकियाँ भी बढ़ी हैं.
सादर अभिनन्दन !!
Arvind Kumar
Times Network,. Mumbai
world-patrakarita.blogspot.com
M A /PGD Communication & Journalism (Hindi)
Better India Better work
जवाब देंहटाएंMr. Arvind, congratulations do you start from journalist work ,this blog very impressive about work for this situation.
जवाब देंहटाएंThanks
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