आब-ए-ज़मज़म
आब-ए-ज़मज़म सऊदी अरब के मक्का शहर में काबा से 20 मीटर दूर मस्जिद अल हरम में स्थापित एक कुंआ है लेकिन यह कोई साधरण कुंआ नहीं है क्योंकि इसका पानी कभी सूखता नहीं और न ही ख़राब होता है। यह गंगा जल के समान शुद्ध और पवित्र माना जाता है। हज यात्री जब भी काबा के दर्शन के लिये मक्का शहर जाते हैं तो वहाँ से इसी कुंए का पानी अपने साथ घर लेकर आते है जिस तरह हिन्दू धर्म के लोग गंगा जल को पवित्र मानकर पूजा पाठ में इस्तेमाल करते हैं वैसे ही इस्लाम में प्रत्येक मुस्लिम के घर पर आब ए जमजम का जल मौजूद होता है। ईसा मसीह के जन्म से 2 हजार साल पहले हज़रत इब्राहिम जिन्हें यहूदी धर्म में अब्राहम कहा जाता है इन्होंने अल्लाह (ईश्वर)के आदेश से अपनी पत्नी हाजिरा और पुत्र स्माइल को एक रेगिस्तान(मक्का की खाड़ी) में छोड़ दिया था और खुद फिलिस्तीन शहर की तरफ जाने लगे तो उनकी पत्नी ने पूछा - क्या हम थोड़े से खजूर और पानी के साथ यहां अकेले रहेंगे लेकिन इब्राहिम ने इसका कोई जवाब नहीं दिया और उन दोनों को छोड़कर चले गए। उस वक़्त यहाँ न इतनी इमारते थीं और न ही रहने वाले लोगों की इतनी जनसंख्या, ...