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हिंदी शब्दावली

 स्वर : किसी जीव-जंतु , पशु-पक्षी , नदी-पर्वत , तालाब-झील या निर्जीव वस्तु आदि से उत्पन्न होने वाली ध्वनि को स्वर कहते हैं लेकिन भाषा में इस स्वर को प्रतीक के रूप में स्वीकार किया जाता है जैसे - अ, इ,ए उ अं अ: आदि।  व्यंजन : स्वर की सहायता से बोले जाने वाले वर्ण या अक्षर व्यंजन कहलाते हैं। जैसे - क ख ग घ ङ  आदि।  वर्ण : किसी स्वर या व्यंजन को जब एक निर्धारित प्रतीक (चिह्न) के रूप में लिखा जाये लेकिन उसके नष्ट होने की संभावना बनी रहे तो उसे वर्ण कहते हैं। जाति और रंग को भी वर्ण कहा जाता है।  अक्षर : जब किसी वर्ण का उच्चारण किया जाये और वह वायु में अनंत समय के लिये यूँ ही प्रवाहित होता रहे तो उसे अक्षर कहते हैं अर्थात जिसका क्षर न हो उसे ही अक्षर कहते हैं  शब्द : दो या दो से अधिक वर्णों का सार्थक समूह ही शब्द कहलाता है। जैसे - जल, वायु, प्रथम आदि।  वाक्य : जब एक या इससे अधिक निश्चित क्रम में लिखे या पढ़े जाने वाले शब्द समूह एक सार्थक भाव या अर्थ प्रदान करें तो उसे वाक्य कहते हैं। जैसे - रुको, मेरी बात सुनो।  उपवाक्य : किसी वाक्य का अधूरा अंश उपवाक्य ...

पत्रकारिता का व्याकरण और शैली

 एक शिक्षित व्यक्ति में जो स्थान अनुशासन और संस्कार (जीवन मूल्य )का होता है, वही स्थान किसी भाषा में व्याकरण और उस भाषा की विशिष्ट शैली का होता है, चूंकि पत्रकारिता की भाषा आम जनमानस की भाषा होती है तो उसके लिये भी अपनी एक व्याकरण और शैली होती है, व्याकरण के बिना भाषा एक अनुशासनहीन इंसान या जानवर की तरह होती है.एक बात और पत्रकारिता में साहित्य की भाषा का प्रयोग दूध और नींबू के मिश्रण जैसा है, अत्यधिक संस्कृतनिष्ट शब्दों के प्रयोग से पत्रकारिता की भाषा का अनुशासन समाप्त होने लगता है. कारक, वचन, शब भेद तथा विराम, अर्ध विराम, पूर्ण विराम, प्रश्नवाचक चिह्न का प्रयोग कहाँ और कैसे करना है इसका ज्ञान होना आवश्यक है.कर्ता के अनुसार ही उसकी क्रिया होती है अतः कर्ता स्त्री लिंग है या  पुर्लिंग इसका ध्यान रखना आवश्यक होता है. शैली का अर्थ किसी भाषा के लहजे, उच्चारण विधि या लेखन के तरीके से है जिसमे किसी प्रकार से लिखित मौखिक और मौलिकता की त्रुटि न हो.  समाचार लेखन में घटना के तथ्यों की जाँच - कब कहाँ क्या और क्यों के आधार पर होनी चाहिए.निष्पक्ष संपादन तथा ऐसी भाषा का प्रयोग हो जो सब...

सोशल मीडिया

 इंटरनेट (अंतर्जाल) के माध्यम से सक्रिय होकर अनेक विकल्प के साथ कार्य करने वाले एप्लीकेसन जिनकी सहायता से हम अपने मित्रों तथा सगे संबंधियों को चित्रों और लिखित रूप से सूचित करते हैं ऐसे सभी संसाधन सोशल मीडिया के रूप में जाने जाते हैं. इतना ही नहीं यह माध्यम आपकी आय का स्रोत भी बन सकते हैं और अज्ञानता के कारण आपको और आपके समाज को बर्बाद भी कर सकते हैं. फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, ब्लॉग, मैसेंजर, व्हाट्सऐप, यू ट्यूब, शेयर चैट, वी चैट, टिक टैक आदि ऐसे 101 सोशल मीडिया हैं लेकिन इसमें प्रमुख माध्यम ही बताने का प्रयास कर रहा हूँ.  ऑफलाइन माध्यम में अख़बार, पत्रिकाएं, कथा साहित्य, अश्लील साहित्य, पत्राचार और गुप्त तथा सांकेतिक कलाकृति आदि साधन उपस्थित हैं जो हमारी अच्छी बुरी विचार धारा को एक दूसरे तक पहुँचाने का कार्य करते हैं. मौखिक और मौलिक संदेश भी हमारे विचारों, हमारी सोंच को समाज में प्रसारित करते हैं.  रेडियो, टेलीविजन, फ़िल्म, नाटक, रंगमंच, खेल आदि सब हमारे लिये सूचना के साथ मन को मोहित करने वाले साधन हैँ, साथ ही आय और रोजगार के अवसर भी प्रदान करते हैं और यही सा...

पत्रकारिता का आधुनिक स्वरुप

 आधुनिक पत्रकारिता अर्थात वर्तमान पत्रकारिता का बीजारोपण उसी दिन हो गया था जब सन 1969 में अमेरिकी रक्षा विभाग के माध्यम से UPCLA तथा   Stanford  संस्थान कंप्यूटर्स का नेटवर्किंग करके इंटरनेट की संरचना की गई. इन्टरनेट पर सूचना को आदान  प्रदान करने के लिए जिस नियम का उपयोग होता है उसे TCP (ट्रांसमिशन कण्ट्रोल प्रोटोकॉल) या IP (इन्टरनेट प्रोटोकॉल) कहते है. इस नेटवर्क को ARPN (एडवांस रिसर्च प्रोजेक्ट इन एजेंसी ) ने बाद में इसको करीब 1980 में लॉन्च किया  और सन ,1980 में ही बिल गेट्स का आईबीएम के कंप्यूटर्स पर एक माइक्रोसॉफ्ट ऑपरेटिंग सिस्टम लगाने के लिए सौदा हुआ और इन्टरनेट  का सही से इस्तेमाल करने के लिए 1984 एप्पल ने पहली बार फ़ाइलों और फ़ोल्डरों, ड्रॉप डाउन मेनू, माउस, ग्राफिक्स का प्रयोग आदि से युक्त “आधुनिक सफल कम्प्यूटर” लांच किया। समाचार पत्र पत्रकारिता का सबसे प्राचीन माध्यम है, चीन में कागज के आविष्कार के साथ ही इस विधा को गति मिली लेकिन आज इसका वैश्विक परिदृश्य बदल चुका है. अख़बार के बाद रेडियो, टेलीविजन तथा कंप्यूटर ने अपना सिक्का जमाया ...

पत्रकारिता : अर्थ एवं परिभाषा

 पत्रकारिता का अर्थ : समाज, राष्ट्र, विश्व और इस अनंत ब्रह्माण्ड की प्रत्येक घटना का किसी भी मातृ भाषा में एक पत्रकार द्वारा किया गया निष्पक्ष लेखन, चित्रांकन, संपादन और प्रकाशन, जिसे एक अनपढ़ भी सुनकर देखकर समझ सके तथा जीवन का मार्गदर्शन करते हुए एक असहाय की आवाज बन सके, ऐसी विषय वस्तु का व्यवसाय ही पत्रकारिता है। वास्तव में पत्रकारिता लोकतंत्र और शासन के मध्य सेतु का कार्य करती है. राष्ट्रीय और प्रांतीय स्तर पर समाज में क्या हो रहा है इसकी सूचना शासन को देना और शासन की सूचना समाज को देना वह भी निष्पक्ष तभी वह पत्रकारिता कहला सकती है, अन्यथा नहीं.  समाचार : एक पत्रकार के माध्यम से किसी घटना के तथ्यों को सही सही एकत्रित करना, उसका सम्पादन एवं प्रकाशन कर अविलम्ब समाज और सरकार तक पहुँचाना, यही समाचार है.  पत्रकारिता का शाब्दिक अर्थ : पत्रकारिता शब्द अंग्रेजी के "जर्नलिज़्म" (Journalism) का हिन्दी रूपान्तर है। शब्दार्थ की दृष्टि से "जर्नलिज़्म" शब्द 'जर्नल' से निर्मित है और इसका आशय है 'दैनिक'। अर्थात जिसमें दैनिक कार्यों व सरकारी बैठकों का विवरण हो। आज ...

पत्रकारिता : उद्भव एवं विकास

 भारतीय पौराणिक कथाओं में नारद नामक एक चरित्र आता है जो एक स्थान से दूसरे स्थान तक सूचनाएं देने का कार्य करता था, चूंकि उस समय कागज का अविष्कार नहीं हुआ था अतः घटनाएं सिद्ध करती हैं कि राजा, महाराजा और चक्रवर्ती सम्राट सूचना और समाचार देने हेतु कुछ विशिष्ट और योग्य कर्मचारी इस तरह के कार्य करते थे और इसके लिए कपड़े का प्रयोग होता था जिसमे मोर पंख और रंगों आदि से सन्देश लिखकर भेजा जाता था. प्रायः गुप्त सन्देश सांकेतिक भाषा में सुनाकर दिए जाते थे अथवा किसी चित्र के माध्यम से दिए जाते थे. महर्षि बाल्मीकि की रामयण और महर्षि वेद व्यास का महाभारत तथा सुमेरियन सभ्यता के ग्रंथो में इस तरह के उदारहण मिलते हैं.  मध्य भारत में जब चन्द्रगुप्त मौर्य का शासन था, उस समय उनके गुरु और महामंत्री रहे आचार्य चाणक्य का गुप्त सूचना तंत्र काफ़ी मज़बूत था और उनकी मृत्यु के बाद सम्राट अशोक के शासन तक उनका यह सूचना तंत्र मजबूती के साथ कार्य को बखूबी अंजाम देता रहा. प्रायः बिष कन्याओं, बिष पुरुषों को इस काम के लिए रखा जाता था. चीन में कागज का अविष्कार होने के बाद मुद्रण कला का विस्तार हुआ और सूचनाएं कागज म...

पत्रकारिता चौथा आधार स्तम्भ

 आधुनिक युग में पत्रकारिता का क्षेत्र अत्यंत विस्तृत और परिष्कृत हो चुका है. न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि वैश्विक स्तर पर इसकी भूमिका काफ़ी महत्वपूर्ण हो चुकी है. अब यह मात्र सूचना के आदान प्रदान तक सीमित नहीं है. वरन इसने लोगों को उनके अधिकार के प्रति जागरूक भी किया है. भारत में विधायिका, न्यायपालिक और कार्यपालिका के बाद पत्रकारिता को चौथे आधार स्तम्भ के रूप में जाना जाता है.  जैसे देश का सर्वोच्च न्यायालय लोगों को न्याय देता है वैसे ही पत्रकारिता लोगों के न्याय के लिए संवैधानिक तरीके से उनके साथ ख़डी होती है. आज हम पत्रकारिता के विभिन्न रूप देख रहे हैं. प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया आदि सभी इसी के रूप हैं. एक ओर जहाँ इसके अच्छे काम की प्रशंसा होती है वही इसे कुछ पत्रकारों की निम्न कोटि की हरकतों और राजीनीति की देवदासी के रूप में भर्त्स्ना भी की जाती है. कोई इसे गोदी मीडिया कहता है तो कोई बिकाऊ मीडिया कहता है.  समझना कठिन है कि इसका वास्तविक स्वरुप क्या है. आज विश्व में टी वी चैनल, यू ट्यूब चैनल, फेसबुक, इंस्टाग्राम, ब्लॉगिंग जैसे सभी सामाजिक माध्यमों क...