पत्रकारिता : उद्भव एवं विकास
भारतीय पौराणिक कथाओं में नारद नामक एक चरित्र आता है जो एक स्थान से दूसरे स्थान तक सूचनाएं देने का कार्य करता था, चूंकि उस समय कागज का अविष्कार नहीं हुआ था अतः घटनाएं सिद्ध करती हैं कि राजा, महाराजा और चक्रवर्ती सम्राट सूचना और समाचार देने हेतु कुछ विशिष्ट और योग्य कर्मचारी इस तरह के कार्य करते थे और इसके लिए कपड़े का प्रयोग होता था जिसमे मोर पंख और रंगों आदि से सन्देश लिखकर भेजा जाता था. प्रायः गुप्त सन्देश सांकेतिक भाषा में सुनाकर दिए जाते थे अथवा किसी चित्र के माध्यम से दिए जाते थे. महर्षि बाल्मीकि की रामयण और महर्षि वेद व्यास का महाभारत तथा सुमेरियन सभ्यता के ग्रंथो में इस तरह के उदारहण मिलते हैं.
मध्य भारत में जब चन्द्रगुप्त मौर्य का शासन था, उस समय उनके गुरु और महामंत्री रहे आचार्य चाणक्य का गुप्त सूचना तंत्र काफ़ी मज़बूत था और उनकी मृत्यु के बाद सम्राट अशोक के शासन तक उनका यह सूचना तंत्र मजबूती के साथ कार्य को बखूबी अंजाम देता रहा. प्रायः बिष कन्याओं, बिष पुरुषों को इस काम के लिए रखा जाता था. चीन में कागज का अविष्कार होने के बाद मुद्रण कला का विस्तार हुआ और सूचनाएं कागज में उकेरी जाने लगीं. मगध साम्राज्य जिसे अब बिहार के नाम से जाना जाता है इसकी कड़ी उस समय के शक्तिशाली सम्राट जरासंध से शुरू होती है जो महाभारत काल में था, उस समय नगाड़े का प्रयोग सूचना देने हेतु किया जाता था. इस तरह हम पाते हैं कि सूचना या समाचार पहुँचाने के लिये कई तरह की विधियां प्रयोग में लाई जाती थी.
ऐतिहासिक रूप भारत का प्रथम समाचार पत्र जनवरी 29/सन् 1780 को प्रकशित हुआ । यह हिंदुस्तान का पहला स्वतंत्र विचारों से पूर्ण समचार पत्र था जो अंग्रेजी भाषा में था। इस समाचार पत्र का संपादन ईस्ट इन्डिया कंपनी के भूतपूर्व अधिकारी " जेम्स ऑगस्टस हिक्की " ने कलकत्ता से किया, जो हिकी बंगाल गजट या बंगाल गजेटिअर के नाम से था।
वैश्विक दृष्टिकोण से पत्रकारिता का प्रारम्भ सन 131 ईस्वी पूर्व रोम में हुआ था। उस साल पहला दैनिक समाचार-पत्र निकलने लगा। उस का नाम था – "Acta Diurna" (दैनिक घटनाएं)। वास्तव में यह पत्थर की या धातु की पट्टी होताी थी जिस पर समाचार अंकित होते थे। ये पट्टियां रोम के मुख्य स्थानों पर रखी जाती थीं और इन में वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति, नागरिकों की सभाओं के निर्णयों और ग्लेडिएटरों की लड़ाइयों के परिणामों के बारे में सूचनाएं मिलती थीं।
मध्यकाल में यूरोप के व्यापारिक केंद्रों में ‘सूचना-पत्र ‘ निकलने लगे। उन में कारोबार, क्रय-विक्रय और मुद्रा के मूल्य में उतार-चढ़ाव के समाचार लिखे जाते थे। लेकिन ये सारे ‘सूचना-पत्र ‘ हस्त लिखित थे।
15वीं शताब्दी के मध्य में योहन गूटनबर्ग ने छापने की मशीन का आविष्कार किया। असल में उन्होंने धातु के अक्षरों का आविष्कार किया। इस के फलस्वरूप किताबों का ही नहीं, अख़बारों का भी प्रकाशन संभव हो गया।
16वीं शताब्दी के अंत में, यूरोप के शहर स्त्रास्बुर्ग में, योहन कारोलूस नाम का कारोबारी धनवान ग्राहकों के लिये सूचना-पत्र लिखवा कर प्रकाशित करता था।
लेकिन हाथ से बहुत सी प्रतियों की नकल करने का काम महंगा भी था और धीमा भी। तब वह छापे की मशीन ख़रीद कर 1605 में समाचार-पत्र छापने लगा। समाचार-पत्र का नाम था ‘रिलेशन’। यह विश्व का प्रथम मुद्रित समाचार-पत्र माना जाता है।
संशोधित : Arvind Kumar
स्रोत : Google India
Good writing and right information
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