पत्रकारिता का व्याकरण और शैली

 एक शिक्षित व्यक्ति में जो स्थान अनुशासन और संस्कार (जीवन मूल्य )का होता है, वही स्थान किसी भाषा में व्याकरण और उस भाषा की विशिष्ट शैली का होता है, चूंकि पत्रकारिता की भाषा आम जनमानस की भाषा होती है तो उसके लिये भी अपनी एक व्याकरण और शैली होती है, व्याकरण के बिना भाषा एक अनुशासनहीन इंसान या जानवर की तरह होती है.एक बात और पत्रकारिता में साहित्य की भाषा का प्रयोग दूध और नींबू के मिश्रण जैसा है, अत्यधिक संस्कृतनिष्ट शब्दों के प्रयोग से पत्रकारिता की भाषा का अनुशासन समाप्त होने लगता है.

कारक, वचन, शब भेद तथा विराम, अर्ध विराम, पूर्ण विराम, प्रश्नवाचक चिह्न का प्रयोग कहाँ और कैसे करना है इसका ज्ञान होना आवश्यक है.कर्ता के अनुसार ही उसकी क्रिया होती है अतः कर्ता स्त्री लिंग है या  पुर्लिंग इसका ध्यान रखना आवश्यक होता है.

शैली का अर्थ किसी भाषा के लहजे, उच्चारण विधि या लेखन के तरीके से है जिसमे किसी प्रकार से लिखित मौखिक और मौलिकता की त्रुटि न हो. 

समाचार लेखन में घटना के तथ्यों की जाँच - कब कहाँ क्या और क्यों के आधार पर होनी चाहिए.निष्पक्ष संपादन तथा ऐसी भाषा का प्रयोग हो जो सबको समझ आ सके, साथ ही आवश्यक चित्रों का छापना भी आवश्यक है क्योंकि एक चित्र हजार शब्दों के बराबर होता है.समाचार अंग्रेजी भाषा के news का हिंदी अनुवाद है.हेडेन के अनुसार East West North South के प्रथम अक्षर से NEWS की रचना हुई है.इसे इस तरह समझेंगे :

N=North

E=East

W=West.

S=South 

समाचार की भाषा में अनुस्वार, अनुनासिक अर्थात चन्द्रबिन्दु (ँ ), अं की मात्रा (ां ) के प्रयोग का अंतर पता होना चाहिए. किस शब्द में आधा न या आधा म का प्रयोग होगा इसकी जानकारी होना चाहिए.अक्षर, वर्ण शब्द वाक्य और अनुच्छेद का अर्थ पता हो ऐसी कोशिश करनी चाहिए. अधिक जानकारी के लिये भाषागत व्याकरण की पुस्तक का अध्ययन करना चाहिए.


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