महामारी नहीं, वायरस युद्ध चल रहा है.

 प्रायः वायरस के तीन रूप मिलते हैं, सजीव, निर्जीव और टेक्निकल और यह तीनों ही हमारे और हमारे समाज के लिये हानिकारक हैं। सजीव और निर्जीव वायरस प्राकृतिक होते हैं लेकिन तीसरा तो स्वयं मानव निर्मित है जो हमारे मोबाईल लैपटॉप और कम्प्यूटर में देखा जाता है लेकिन आज हम जिस वायरस की बात करने जा रहे है वह जैविक है जिसका निर्माण वैज्ञानिक अपनी प्रयोगशाला में कर सकते हैं, करते हैं और आगे भी करेंगे. वर्तमान में जिस वायरस ने  भारत समेत सारे विश्व को अपनी चपेट में ले रखा है और जो लगातार मानवता के लिये ब्रह्मराक्षस बना हुआ है हम उसी चौथे वायरस द्वारा होने वाले नरसंहार की बात कर रहे है जिसे संक्षेप में कोविड -19 कहा गया है। भारत में इस वायरस का पहला केस 30 जनवरी, 2020 को केरल राज्य में मिला और धीरे धीरे इसने आस पास के लोगों को संक्रमित करना शुरू किया। बाहरी देशों, अरब और शार्क देशो तथा पडोसी देशों से लोग आते गए और इस वायरस का विस्तार दिन दूनी रात चौगुना बढ़ता गया। 

कब और कहाँ से आया कोविड -19 (कोरोना वायरस) ? 

इस विषय पर विचार भिन्न हैं। वायरल खबरों, विश्लेषकों और डॉक्टर्स सहित विशेषज्ञों का मानना है कि यह वायरस पडोसी देश चाइना के वुहान शहर से फैलना शुरू हुआ जो कि मृत चमगादड़ के अधपके मांस में पाया गया था। यह तो जगजाहिर है कि शायद ही कोई ऐसा जीव हो इस धरती पर जिसे चाइना वालों ने उसका अबतक स्वाद न लिया हो, यह तो भोजन में मांसाहार की प्रयोग धर्मिता ही कही जा सकती है जिसमे किसी भी जीव को मार कर खाने का समीकरण शामिल  हो. बहरहाल चाइना के वुहान शहर में एक ऐसी प्रयोगशाला मिली है जो कड़ी सुरक्षा में विभिन्न जानवरों, पक्षियों तथा कीड़े मकोड़ों में पाए जाने वाले वायरस का अध्ययन करती है। खबरों पर यकीन करें तो भारत सहित कई देशों ने चाइना के साथ कड़ी आपत्ति जताई है जिसे चाइना ने सिरे से ख़ारिज किया है। 

वैश्विक स्तर पर संक्रमित लोग, वायरस से  होने वाली मौत के आंकड़े चौकाने वाले हैं, वहीं दूसरी ओर एक ऐसा वर्ग भी है जिसे अब तक यकीन ही नहीं है कि कोई वायरस है, जबकि कोविड -19/कोविड ओ पी डी /डेल्टा प्लस/ब्लैक फंगस के केस अब भी बढ़ रहे हैं, तो राजनितिक खिलाड़ी खुद का वर्चस्व दिखाने के लिये एक दूसरे को कोसते हुए नजर आ रहे हैं, विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार एक विवरण देखें -

नए मामले (जुलाई 3/2021)

१८२,३१९,२६१

वे केस जिनकी पुष्टि हो चुकी है

3,954,324

मौतें

2,950,104,812 

एक जमाना था जब युद्ध तीर तलवार से होते थे फिर तोप और गोले बारूद से होने लगे और अब ड्रोन, मिसाइल, ए के -47, टाइम बम आदि पर आगये लेकिन अब तो इनकी भी जरूरत नहीं, केवल ऐक घातक वायरस तैयार करो और कहीं आने जाने की जरूरत भी नहीं, न शक, न एफ आई आर और न ही कोई केस चलता है क्योंकि अब लोग तो मरते हैं लेकिन उसे युद्ध नहीं महामारी कहा जाता है. यदि सागर में कोई बड़ी मछली तानासाह हो जाये तो उसे मारने के लिये छोटी छोटी मछलियों को उस बड़ी मछली का विरोध करने के लिये एक होना पड़ेगा। वैसे तो रूस अमरीका चाइना से बड़े हैं लेकिन आज चाइना सारी दुनियां को सबक दे रहा है भले ही इसे वह महामारी कहे लेकिन सच हमेशा कड़वा होता है। 

राजनीतिक विरोधाभास के इस दौर में आप किसके पास अपनी जान बचाने के लिये जायेंगे... क्या मजहब, क्या धर्म, क्या पार्टी और क्या सरकार। वास्तव में आप की मौत महज एक सूचना है, एक अकड़ा है। भविष्य और कुछ नहीं इतिहास (अतीत ) और वर्तमान के मध्य सही निर्णय को स्थापित करना भर होता है। आज भी छोटे छोटे देशों पर बड़े राष्ट्रों द्वारा कब्जा करने का जज्बा बरकरार है तभी चाइना, पाक, बांग्ला आदि देश सतत भारतीय सीमाओं का अतिक्रमण जारी रखते हैं। क्रमशः... 



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