शैक्षिक बेरोजगार
कान्वेंट स्कूल अरबपति बनते गए और हम भिखारी बनते गए क्यों ? सरकारी स्कूल झोपड़ पट्टी बन गए तो प्राइवेट स्कूलों की चांदी हो गई। पढ़लिखकर बच्चा बड़ा तो हुआ लेकिन सरकारी नौकरी में नेताओं के रिश्तेदार नातेदार, पड़ोसी विरादरी घुस गए और हम चपरासी की लाइन में खड़े होकर आय और जाति प्रमाण पत्र बनवाते रहे क्यों ? भारतीय संविधान में मूलाधिकारों की रक्षा के नाम पर अश्पृश्यता पर अधिनियम तो बन गया लेकिन आज भी शादी विवाह अपनी विरादरी में न हो तो परिवार में महाभारत हो जाता है और शुभद्रा अर्जुन को ले जाती है तो कृष्ण रुक्मिणी के प्रेम में प्रेम विवाह की आधारशिला का अनावरण कर देते हैं। यदि संविधान छुवा छूत को अपराध मानता है तो जाति प्रमाण पत्र क्यों ? सैलरी 3000/- और आय प्रमाण पत्र चाहिए. नीरव मोदी, विजय माल्या, काला धन, नौकरी और कर्ज में अमीरों से कोई प्रमाण माँगा जाता है क्या ?
हमें बेटे को इंग्लिश मीडियम ही पढ़ाना है बेटा भले ही बड़ा होकर चोर बन जाये या प्राइवेट में 5000/- की नौकरी करे लेकिन सरकारी और हिंदी मीडियम तो नहीं पढ़ाएंगे, भारतीय लोगों की इसी मानसिकता ने देश में कान्वेंट स्कूलों को अरबपति बनाया और भारतीय पति ही बने रहे। हमारी आश्रम की गुरुकुल व्यवस्था को ध्वस्त करके लार्ड मैकाले ने भारत में अंग्रेजी का साम्राज्य खड़ा कर दिया और गाँव के भोले भाले लोगों ने अंग्रेजी सीखने में जीवन गंवा दिया लेकिन अपनी योग्यता का आकलन न कर पाए और सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी में ही संतोष कर लिया या कर्ज की भैंस लेकर गाँव के दूधिया को 30/- लीटर का दूध नापते रहे, खाते गए और कर्ज बढ़ता गया, बैंक वाले महल खड़े करते रहे क्योंकि हमने अपनी कीमत नहीं समझी और हाँ मालिक, हाँ सरकार करते रहे।
मातृभाषा, राष्ट्र भाषा का डंका पीटते रहे और अंग्रेजी की कांफ्रेस अटेंड करते रहे, अंग्रेजी मीडिया, अंग्रेजी फिल्मों पर गर्व करते रहे। क्या आपको नहीं लगता की भारतीय पत्र मुद्रा में सम्राट अशोक के चिह्न के साथ गाँधी को नहीं बल्कि चाणक्य को होना चाहिए ? क्या स्वतंत्रता संग्राम केवल गाँधी नेहरू ने लड़ा और चन्द्रगुप्त मौर्य, सुभाष, आजाद, चाणक्य जेलेबी खाते रहे ? कलम में बहुत ताकत है, यह इतिहास बदलती है और तकदीर भी, आबाद भी करती है और सही दिशा न मिले तो बर्बाद भी, आपको राजा बनना है राजकुंद्रा नहीं। अपनी भाषा से प्रेम करेंगे तो देश आप पर गर्व करेगा.
अरविन्द कुमार टाइम्स नेटवर्क, मुंबई
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